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आसक्ति की परिभाषा

ॐ नमः शिवाय। आसक्ति मानसिक क्रिया है। इसका अभिप्राय यह है कि मन बार-बार अपनी आसक्ति के विषयों की ओर भागता है जो किसी व्यक्ति, इन्द्रिय विषय, प्रतिष्ठा, शारीरिक सुख त्यादि में हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति या इन्द्रिय विषय का विचार हमारे मन में बार-बार उठता है तब निश्चय ही यह मन का उसमें आसक्त होने का संकेत है। यदि यह मन ही आसक्त हो जाता है तब भगवान इस आसक्ति के विषय के बीच बुद्धि को क्यों लाना चाहते हैं। क्या आसक्ति का उन्मूलन करने में बुद्धि की कोई भूमिका होती है? हमारे शरीर में सूक्ष्म अंत:करण होता है जिसे हम बोलचाल की भाषा में हृदय भी कहते हैं। यह मन, बुद्धि और अहंकार से निर्मित होता है। इस सूक्ष्म शरीर में बुद्धि मन से श्रेष्ठ है जो निर्णय लेती है जबकि मन में इच्छाएँ उत्पन्न होती है और यह बुद्धि द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार मोह के विषयों में अनुरक्त हो जाता है।  उदाहरणार्थ यदि मनुष्य की बुद्धि यह निर्णय करती है कि धन सम्पत्ति ही सुख का साधन है तब मन में धन प्राप्त करने की लालसा उत्पन्न हो जाती है। यदि बुद्धि यह निश्चय करती है कि जीवन में प्रतिष्ठा ही सबसे महत्त्वपूर्ण है तब मन...

ग्रहों के अशुभ फल

ॐ नमः शिवाय। कौन सा ग्रह क्या अशुभ फल देता है:- सूर्य सरकारी नौकरी या सरकारी कार्यों में परेशानी, सिर दर्द, नेत्र रोग, हृदय रोग, अस्थि रोग, चर्म रोग, पिता से अनबन आदि। चंद्र मानसिक परेशानियां, अनिद्रा, दमा, कफ, सर्दी, जुकाम, मूत्र रोग, स्त्रियों को मासिक धर्म, निमोनिया। मंगल अधिक क्रोध आना, दुर्घटना, रक्त विकार, कुष्ठ रोग, बवासीर, भाइयों से अनबन आदि। बुध ज्योतिष आचार्य आनन्द जालान के अनुसार गले, नाक और कान के रोग, स्मृति रोग, व्यवसाय में हानि, मामा से अनबन आदि। गुरु धन व्यय, आय में कमी, विवाह में देरी, संतान में देरी, उदर विकार, गठिया, कब्ज, गुरु व देवता में अविश्वास आदि। शुक्र जीवन साथी के सुख में बाधा, प्रेम में असफलता, भौतिक सुखों में कमी व अरुचि, नपुंसकता, मधुमेह, धातु व मूत्र रोग आदि। शनि वायु विकार, लकवा, कैंसर, कुष्ठ रोग, मिर्गी, पैरों में दर्द, नौकरी में परेशानी आदि। राहु त्वचा रोग, कुष्ठ, मस्तिष्क रोग, भूत प्रेत वाधा, दादा से परेशानी आदि। केतु नाना से परेशानी, भूत-प्रेत, जादू टोने से परेशानी, रक्त विकार, चेचक आदिल आपका अपना  आचार्य दीपक सिक्का  संस्थापक ग्रह चाल कंसल्...

Puja and Hygiene

Aum Namah Shivay. Can We Do Puja Without Maintaining Hygiene?  Well, here is what different scriptures mention about this. Read it completely and you will get all kind of answers related to this question:  Vishnu Smrti - Chapter 64, Verse 9:  न चाशौचवता कार्यं देवतार्चनकर्म वै ।  यस्तत्करोति मोहेन तस्य तन्निष्फलं भवेत् ॥ Meaning - A person who is in a state of impurity must indeed not perform the act of worshipping the deity. He/she who performs it out of delusion, that act of his shall become fruitless. According to Kularnava Tantra - Chapter 9, Verse 88- न वारिणा शुध्यते देही नान्तःशौचेन शुध्यति । अन्तःशौचेन शुध्यन्ति तस्मादन्तः शुचिर्भवेत् ॥ The embodied atma is not purified by water, nor is it purified without internal purity. It is by internal purity that beings are purified; therefore, one should be pure within. According to Garuḍa Puraṇ - Parva Khaṇḍa, Chapter 222 - अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा ।  यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचि...

वेदों के अनुसार काम वासना क्या है???

ॐ नमः शिवाय। वेदों में प्रयुक्त काम शब्द या वासना केवल यौन इच्छाएँ नहीं हैं बल्कि इसमें सभी प्रकार के भौतिक सुख भी सम्मिलित हैं।  इस प्रकार वासना कई रूप दर्शाती है। जैसे:-  धन की इच्छा, शारीरिक लालसाएँ, प्रतिष्ठा की अभिलाषा, सत्ता की भूख इत्यादि। वासना केवल भगवान के प्रति प्रेम का विकृत प्रतिबिंब है जो कि प्रत्येक जीवित प्राणी का अंतर्निहित स्वभाव है।  जब आत्मा शरीर से संयुक्त होकर माया शक्ति के सम्पर्क में आती है तब तमोगुण के संयोग से इसका दिव्य प्रेम वासना में परिवर्तित हो जाता है।  दिव्य प्रेम भगवान की सर्वोच्च शक्ति है। अतः भौतिक क्षेत्र में इसका विकृत स्वरूप जो कि काम वासना है, वह भी अति प्रबल शक्ति है।  श्रीकृष्ण ने सांसारिक सुखों के भोग की लालसा को पाप के रूप में चिह्नित किया है क्योंकि यह प्रलोभन हमारे भीतर छिपा रहता है।  रजोगुण आत्मा को यह विश्वास दिलाता है कि सांसारिक विषय भोगों से ही तृप्ति प्राप्त होगी। इसलिए किसी भी मनुष्य में इन्हें प्राप्त करने की कामना उत्पन्न होती है।  जब कामना की पूर्ति होती है तब इससे लोभ उत्पन्न होता है और इसकी संतु...

Spiritual Teachings

Aum Namah Shivay. There are many  great sages and devotees in Hindu tradition whose lives teach powerful spiritual lessons, Here are a few important ones with key points: 1️⃣ Valmiki • Originally a forest robber named Ratnakara. • Transformed into a great sage through devotion and meditation. • Author of the sacred epic Ramayana. • Known as the Adi Kavi (first poet) in Sanskrit literature. Lesson: Anyone can transform through devotion and sincere repentance. 2️⃣ Ved Vyasa • Compiler of the Vedas and author of the Mahabharata. • Also composed the Bhagavata Purana and many other Puranas. • Known as one of the greatest sages in Hindu tradition. Lesson: Knowledge and wisdom guide humanity toward dharma. 3️⃣ Prahlada • A great devotee of Lord Vishnu even as a child. • Son of the demon king Hiranyakashipu. • Protected by Lord Vishnu in the form of Narasimha. Lesson: True devotion protects a devotee in every situation. 4️⃣ Dhruva • A young prince who performed intense meditation to see Lo...

रुका हुआ धन प्राप्त करने के उपाय

 ॐ नमः शिवाय  रुका हुआ धन प्राप्त करने के उपाय 1. पीपल को जल अर्पित करें (शनिवार) शनिवार की सुबह पीपल के पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें और सात परिक्रमा करें। इससे शनि की कृपा मिलती है और रुका हुआ धन मिलने में सहूलियत होती है। 2. सरसों के तेल का दीपक जलाना शनिवार की संध्या को पीपल के नीचे या शनि मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएँ। यह बाधाओं को दूर करता है। 3. गोमती चक्र या श्री यंत्र की स्थापना शुक्रवार के दिन घर के पूजा स्थान या तिजोरी में गोमती चक्र या श्री यंत्र स्थापित करें। धूप-दीप दिखाकर ही रखें। यह धन के स्थायित्व और प्रवाह को बढ़ाता है। 4. दान करना शनिवार को काले तिल, सरसों का तेल या काले वस्त्र का दान किसी गरीब को करें। इससे ग्रह दोष शांत होते हैं और अटका हुआ धन वापस आने लगता है। 5. मंत्र जाप प्रतिदिन सुबह 108 बार “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप करें। यह धन-संपत्ति आकर्षित करने और अड़चनें दूर करने में बेहद प्रभावी है। आपका अपना  आचार्य दीपक सिक्का  संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी

अबूझ मुहूर्त का पाखण्ड

 ॐ नमः शिवाय  अबूझ मुहूर्त का पाखण्ड आजकल एक नई प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है कि लोग अपने विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञोपवीत या अन्य शुभ कार्यों के लिए ज्योतिषीय मुहूर्त पूछने के बजाय कुछ पर्वों और त्योहारों को ही “अबूझ मुहूर्त” मानकर उसी दिन कार्य सम्पन्न कर लेते हैं। यह प्रवृत्ति शास्त्रीय परंपरा की दृष्टि से उचित नहीं कही जा सकती। वास्तव में मुहूर्त शास्त्र अत्यन्त सूक्ष्म और वैज्ञानिक प्रणाली है, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, ग्रहस्थिति, लग्न आदि अनेक तत्वों का विचार करके ही किसी कार्य के लिए अनुकूल समय निर्धारित किया जाता है। यदि इन सभी सिद्धान्तों की उपेक्षा करके केवल किसी पर्व को ही स्वतः शुभ मान लिया जाए, तो यह मुहूर्त शास्त्र की मूल भावना के विरुद्ध है। १. चैत्र नवरात्रि बहुत से लोग मानते हैं कि चैत्र नवरात्रि में सभी शुभ कार्य किए जा सकते हैं। परंतु इस समय प्रायः सूर्य मीन राशि में होते हैं और यह काल मीन संक्रांति अथवा खरमास के अंतर्गत आता है। शास्त्रों में इस अवधि में विवाह आदि मांगलिक कार्य सामान्यतः वर्जित बताए गए हैं। २. गणेश चतुर्थी भगवान गणेश की उपासना का यह अत्...

मन की चिकित्सा ग्रहों के माध्यम से

ॐ नमः शिवाय। मन की चिकित्सा ग्रहों के माध्यम से (तत्व-आधारित नवग्रह उपायों का मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण) वैदिक ज्योतिष में नवग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — हमारे आंतरिक और बाहरी संसार को प्रभावित करते हैं। जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु और अन्न/शरीर से जुड़े पारंपरिक उपाय केवल अंधविश्वास नहीं हैं, बल्कि गहरे मनोवैज्ञानिक प्रभाव रखते हैं। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से ये उपाय अवचेतन प्रतीकों को सक्रिय करते हैं, सजगता बढ़ाते हैं और भावनात्मक संतुलन के लिए मस्तिष्क की न्यूरल संरचनाओं को पुनः प्रशिक्षित करते हैं। प्रत्येक तत्व एक मानसिक कार्य से जुड़ा है: जल – भावना और प्रवाह अग्नि – इच्छा शक्ति और दिशा पृथ्वी – स्थिरता और ग्राउंडिंग वायु – विचार और श्वास अन्न/शरीर – पोषण और आत्म-मूल्य इनके साथ कार्य करने से ज्योतिष अमूर्त विचार न रहकर एक जीवंत, उपचारात्मक अनुष्ठान बन जाता है। --- 🌞 सूर्य: प्राणशक्ति, अहं, उद्देश्य जल उपाय: प्रतिदिन प्रातः उगते सूर्य को अर्घ्य देना केवल कर्मकांड नहीं है; यह आत्मविश्वास और उद्देश्य की भावना को मन में स्थापित करता है। पूर्व दिशा की ओर मुख क...

साधना के गुप्त प्रभाव

ॐ नमः शिवाय। पीड़ा और समस्याओं के पीछे का विज्ञान, साधना के गुप्त प्रभाव जो सामान्य धारणा से भिन्न होते हैं, ज्योतिषीय नियम जो पुस्तकों के अनुसार काम नहीं करते। हम में से अधिकांश जो आध्यात्मिक क्षेत्रों में गहराई से उतरते हैं, उन्होंने अनगिनत स्तर की पीड़ा और आघात का अनुभव किया है। यह सार्वभौमिक नहीं है, लेकिन बड़े पैमाने पर ऐसा होता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह घटनाएं लगातार होती रहती हैं, जो हमारे भीतर की अच्छाई को चुनौती देती हैं। अक्सर पूछा जाता है कि ऐसा क्यों होता है और इतनी क्रूरता से क्यों होता है, और सबसे महत्वपूर्ण, इतनी बार क्यों होता है? चलिए जानते हैं:- 🦜 सबसे पहले, यह केवल सच्चे साधक के साथ होता है। यह जीवन में नकारात्मक तत्वों द्वारा उत्पन्न प्रभावों के समान भी है। इसलिए, इन दोनों के बीच अंतर करना आवश्यक है और जाहिर है कि जो व्यक्ति पीड़ित है, वह इसका कारण नहीं समझ सकता क्योंकि उसका मन उस स्तर पर नहीं होता है कि वह मूल कारण को समझ सके। 🦜 नियमित परीक्षण होते रहेंगे। आपको धन अर्जित करने के अवसर मिलेंगे जिसमें दूसरों को धोखा देना, कामुक लालच से मार्ग से भटकना, विरोधिय...

भारत के संत

ॐ नमः शिवाय  भारत के संन्यासी (समयरेखा और योगदान) वयम् अमृतस्य पुत्राः (श्वेताश्वतरोपनिषद्) अमृतस्य पुत्रा वयं, सबलं सदयं नो हृदयम्। गतमितिहासं पुनरुन्नेतुं, युवसङ्घटनं नवमिह कर्तुम्॥ भारतकीर्तिं दिशि दिशि नेतुं, दृढसंकल्पा विपदि विजेतुम्। ऋषिसन्देशं जगति नयेम, सत्त्वशालिनो मनसि भवेम॥ कष्टसमुद्रं सपदि तरेम, स्वीकृतकार्यं न हि त्यजेम। दीनजनानां दुःखविमुक्तिं, महतां विषये निर्मलभक्तिम्॥ सेवाकार्ये सन्ततशक्तिं, सदा भजेम भगवति रक्तिम्। सर्वे अमृतस्य पुत्राः शृण्वन्तु ये दिव्यानि धामानि आतस्थुः॥ युजे वां ब्रह्म पूर्व्यं नमोभिर्विश्लोक एतु पथ्येव सूरेः। शृण्वन्तु विश्वे अमृतस्य पुत्रा आ ये धामानि दिव्यानि तस्थुः॥ (श्वेताश्वतरोपनिषद् – द्वितीय अध्याय) --- भारत की आध्यात्मिक धरोहर उसके संतों, ऋषियों और रहस्यवादी साधकों के जीवन से सदैव प्रकाशित होती रही है। हम अमरत्व की संतान हैं, इसलिए हमारे हृदय बलवान और करुणामय हों। आओ, हम भूले हुए इतिहास को पुनर्जीवित करें और एक नवीन युवा संगठन का निर्माण करें। भारत की कीर्ति चारों दिशाओं में फैले और विपत्ति में भी दृढ़ संकल्प के साथ हम विजयी बनें। ऋषिय...

चंद्रग्रहण ३ मार्च २०२६

ॐ नमः शिवाय  खग्रास(ग्रस्तोदय) चंद्रग्रहण 03 मार्च 2026, मंगलवार सूतक काल   प्रात: 06:20 बजे से सायं 06:40 बजे तक ग्रहण काल    दोपहर 03:20 बजे से सायं 06:40 बजे तक ग्रहण समाप्त सायं 06:40 बजे तक                             यह ग्रहण फाल्गुनी पूर्णिमा 3 मार्च 2026 दिन मंगलवार को संपूर्ण भारत में ग्रस्तोदय रूप में दिखाई देगा। अर्थात भारत के किसी भी शहर में जब तक चन्द्रोदय होगा उस से पहले ही यह खग्रास चंद्रग्रहण प्रारंभ हो चुका होगा।भारत के किसी भी नगर में इस ग्रहण का प्रारंभ तथा ग्रहण मध्य नहीं देखा जा सकेगा। भारत के केवल पूर्वी राज्यों में इस ग्रहण की खग्रास समाप्ति देखी जा सकेगी। ग्रहण के सूतक तथा ग्रहणकाल में स्नान, दान, जप, पाठ, मंत्र, स्त्रोत–पाठ, मंत्र सिद्धि, तीर्थ स्नान, ध्यान, आदि शुभ कृत्य करना कल्याणकारी होता है। सूतक एवं ग्रहण काल में मूर्ति स्पर्श करना, अनावश्यक खाना पीना, निद्रा, नाखून काटना, तैलाभ्यंग वर्जित है। सूतक काल में वृद्ध, रोगी, बालक एवं गर्भवती महिलाओं को यथानुकुल भोजन या...

चंद्रग्रहण के कुछ उपाय

ॐ नमः शिवाय  चंद्रग्रहण के दौरान कुछ ज्योतिष उपाय करने से नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है और शुभता प्राप्त की जा सकती है।  चंद्रग्रहण के कुछ उपाय  मंत्र जाप चंद्रग्रहण के दौरान कुछ विशिष्ट मंत्रों का जाप करना लाभकारी होता है, जैसे कि:—      ॐ सों सोमाय नमः।     ॐ चं चंद्रमसे नम:।      ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः।      ॐ शीतांशु विभांशु अमृतांशु नम:।      ॐ ऐं क्लीं सौमाय नामाय नमः ________________________ दान और पूजा ग्रहण के बाद दान करना और भगवान शिव की पूजा करना शुभ होता है। ________________________ सावधानियां ग्रहण के दौरान कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए जैसे कि:—      १.खाना बनाने और खाने से बचना २.सोने से बचना ३.नकारात्मक जगहों पर न जाना ४.धारदार वस्तुओं का इस्तेमाल न करना आपका अपना  आचार्य दीपक सिक्का  संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी