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शुक्र मंगल युति मेरी नज़र से

 ॐ नमः शिवाय शुक्र—मंगल युति मंगल को अग्नि और तेज का प्रतीक माना गया है। शरीर में रक्त पर मंगल का प्रभाव होता है। शारीरिक बल और शारीरिक ऊर्जा भी मंगल के कार्यक्षेत्र में आती है। मंगल धैर्य और जल्दबाजी भी देता है। वहीं शुक्र जल और कोमलता का प्रतीक है। शुक्र सौंदर्य, प्रेम, वासना, काम, यौन इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है।  जब इन दोनों ग्रहों का मिलन होता है तो इनके गुणधर्मों के अनुसार व्यक्ति में काम वासना बलवती हो जाती है। कुंडली के अलग-अलग भावों के अनुसार इनके फल में कम-ज्यादा हो सकता है, लेकिन मूलत: यह व्यक्ति को अत्यंत कामी बनाता है। ऐसे व्यक्ति विपरीत लिंग के प्रति अत्यंत आकर्षित रहते हैं। निर्णय लेने में जल्दबाजी होने के कारण ये उचित और अनुचित का भेद नहीं कर पाते। धैर्यहीनता होने की वजह से ये अत्यंत उग्र और कामी हो जाते हैं और कुछ अनुचित कर बैठते हैं। शुक्र मंगल की युति किसी भी भाव में हो तो जातक, काम पीड़ित होता है । यदि यह युति पंचम, सप्तम, नवम भाव में हो तथा पाप दृष्ट हो तो अत्यंत कष्टकारी होती है किसी शुभ ग्रह की दृष्टि होने पर इसमें कुछ कमी आ सकती है।  कामवासना के ...

शनि केतु युति मेरी नज़र से

 ॐ नमः शिवाय शनि केतु की युति शनि और केतु का योग। मेरे विचार से इस योग में बहुत कुछ है।  संघर्ष है तो ज्ञान भी है अध्यात्म भी है।  विरक्ति है तो आसक्ति भी है। इस योग के दो पहलू हैं:— १) सांसारिक २) आध्यात्मिक सांसारिक पहलू को देखें तो ये काफी संघर्ष कराता है, कार्यक्षेत्र में बाधाएं उत्पन्न करता है, कोई भी कार्य बिना विघ्न के पूरा नहीं होता और कभी कभी तो पूरा होता ही नहीं। जिस भाव में बन जाए उस भाव से संबंधित रिश्ते नातों में तनाव और विच्छेद दे देता है। विरक्त बना देता है, अकेलापन दे देता है। लेकिन वहीं अगर हम अध्यात्म के दृष्टिकोण से देखें तो कहना ही क्या। अत्यंत शुभ योग बन जाता है। कर्म के स्वामी शनि के साथ विरक्ति और मोक्ष के स्वामी केतु का मिलन ऐसा लगता है मानो भक्ति (कर्म) में लीन होकर अपने शिव (मोक्ष) को प्राप्त कर लिया हो।  उच्च कोटि का आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कर ज्ञानी बना देता है ये योग, जीवन की कला सीख देता है ये योग, मनुष्य के एकमात्र ध्येय शिव से मिलन कराता है, और तो और उच्च कोटि का विद्वान, ज्योतिष, भविष्य वक्ता बना देता है। महा ध्यानी बना देता है। आत्मा...

बच्चे के जन्म के समय से संबंधित कुछ ज्योतिषीय तथ्य

 ॐ नमः शिवाय बच्चे के जन्म के समय से संबंधित कुछ तथ्य:— लग्न का महत्व यदि बालक के जन्म समय में लग्न तुला , वृश्चिक , कुम्भ , मेष , कर्क हो तो प्रसव के घर का द्वार पूर्वमुख था। यदि कन्या, धनु, मीन, मिथुन लग्न में बालक का जन्म हो तो प्रसूतिघर का द्वार उत्तर की ओर था। जन्म लग्न वृष लग्न हो तो प्रसूति द्वार पश्चिम मुख होगा। जन्म समय सिंह और मकर लग्न हो तो प्रसूती द्वार दक्षिण होना चाहिए। बच्चे के रोने का महत्व बालक के जन्म समय में मेष , वृष , सिंह , मिथुन , तुला लग्न हो तो बालक *जन्म लेते ही रोया* करते है । कुम्भ, कन्या लग्न वाले बालक कुछ कम रोदन करते है कर्क , वृश्चिक , धनु , मीन लग्न में जन्मे बालक जन्म लेते ही नहीं रोते ये कुछ समय बाद रोते है। मेष ,वृष , मिथुन , सिंह , तुला लग्नों में बालक का जन्म हो तो यह बालक सब ज्ञान को भूलकर बहुत रोदन करता है कुम्भ और कन्या लग्न वाले कुछ समय के लिए रोते है। जन्म समय महत्व सुबह 4 से 6 बजे :  इस समयावधि के मध्य जन्म लेने वाले बच्चे का सूर्य प्रबल होता है। यह अच्छे स्वास्थ्य और आत्मविश्वास का प्रतीक है। ऐसे बच्चे प्रत्येक कार्य के प्रति दृढ़ सं...

वास्तु द्वारा संपत्ति को आकर्षक बनाना, संपत्ति को किराए पर चढ़ाने के लिए संबंधित वास्तु उपाय

 ॐ नमः शिवाय वास्तु द्वारा संपत्ति को आकर्षक बनाना, संपत्ति को किराए पर चढ़ाने के लिए संबंधित वास्तु उपाय  अपनी प्रॉपर्टी को आकर्षक बनाने के लिए वास्तु सम्मत बहुत से उपाय दिए गए हैं। उनमें से कुछ मुख्य उपाय निम्नलिखित हैं:— १) अपने घर में रखे बेकार सामान को समय समय पर अलविदा करें।  २) घर में वायु एवं रोशनी का आवागमन अच्छा होना चाहिए। ३) घर में मुख्य द्वार पर स्वस्तिक, ॐ, शुभ लाभ आदि चिन्ह लगा सकते हैं।  ४) मुख्य द्वार पर विंड चाइम, शीशा आदि लगा सकते हैं जिससे नकारात्मक ऊर्जा अंदर प्रवेश न करे। ५) नॉर्थ दिशा कस्टमर्स की है तो इसको साफ सुथरा और ठीक रखें क्योंकि किरायेदार (कस्टमर) आपको यहीं से मिलेगा। ६) NNW दिशा अट्रैक्शन की है तो इसको भी साफ सुथरा और ठीक रखें।  ७) ईस्ट दिशा और ENE दिशा सामाजिक सम्बन्धो एवं खुशियों की दिशा है इन को भी साफ सुथरा और ठीक रखें।  ८) SE दिशा कैश फ्लो की है इसको भी साफ सुथरा और ठीक रखें क्योंकि आपकी प्रॉपर्टी की कीमत यहीं से मालूम होगी।  ९) पूरे घर में गूगल, कपूर और लौंग का धुआं सप्ताह में एक बार ज़रूर करें। १०) सप्ताह में एक ब...

राशियों के अनुसार पौधे

ॐ नमः शिवाय राशियों के अनुसार पौधे  आइए आज जानते हैं प्रत्येक राशि के अनुसार शुभ पौधे। अपनी राशि अनुसार इन पौधों को लगाकर आप अपने जीवन में ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं और सकारात्मक प्रभाव को बढ़ा सकते हैं।  मेष राशि:—  मेष राशि वाले को अपने राशि स्वामी मंगल के पेड़ लाल चंदन, अनार, नीबू, तुलसी, आंवला, आम और खैर का पेड़ लगाना चाहिए। वृष राशि:—  इस राशि वालों को अपने राशि स्वामी शुक्र के अनुसार गुलर (ऊमर), चमेली, नीबू, अशोक, जामुन और पलाश के पेड़ लगाने चाहिए। मिथुन राशि:—  इस राशि का स्वामी बुध होता है, अपामार्ग, आम, कटहल, अंगूर, बेल, बांस, बरगद और गुलाब के पौधे लगाना चाहिए। कर्क राशि:—  कर्क राशि का स्वामी चन्द्रमा है, पलाश, सफ़ेद गुलाब, चांदनी, मोगरा, आंवले, पीपल और गेंदा के पेड़ लगाने चाहिए। सिंह राशि:—  इस राशि का स्वामी सूर्य है, अपामार्ग, लाल गुलाब, लाल गेंदा, जामुन,बरगद और लाल चन्दन का पेड़ लगाना चाहिए। कन्या राशि:—  इस राशि का स्वामी बुध होता है अपामार्ग, आम, कटहल, अंगूर, बेल, अमरूद और गुलाब के पौधे लगाना चाहिए। तुला राशि:—  इ...

SADHE SATI

AUM NAMAH SHIVAY  SADHE SATI In astrology, Saturn is considered as the most impactful planet in the entire system. It is believed that if your Saturn is strong, you will be happier and wealthier but as soon as your Saturn changes its path, your life is destroyed. There are two most common Saturn affects on Kundali called as Shani Sade Sati and Shani Dhayya. Shani Sade Sati is considered more harmful than Shani Dhayya. Sade-Sati is the 7 1⁄2 years long period of Saturn (Shani). This astrological phase is much feared by those in India who give credence to Indian Astrology. According to those beliefs, this is a period with many challenges. According to one school of Vedic astrology, this is a troublesome time for the individual who is going through it. If Saturn is ill-placed in bad houses, he may face challenges that reflect this bad placement. Another school of astrology that believes that though the sadhe sati period is challenging, it is not as damaging as many astrologers claim a...

SHANI DOSHA

 AUM NAMAH SHIVAY  SHANI DOSHA Shani Dosh occurs in a natal chart, when the planet Saturn is either ill-placed in the chart or is rather weak/debilitated or is in a retrograde position in the birth horoscope. Conjunction of Saturn with Mars, or Moon, or Rahu, etc., may also create shani dosha. Here, it may be noted that Shani is exalted in Libra, and is debilitated in the sign of Aries. Again, location of Saturn in any of the Cardinal houses or in the eighth or twelfth house, especially in the Aries, Cancer, Leo, or Scorpio sign, creates substantial shani dosha in the birth chart. CAUSES 》Hurting and harming people and other creatures through the ways possible, knowingly or by mistake 》Practicing wickedness, hypocrisy, sadism 》Keeping an evil eye towards money and possessions, success, and happiness of other people of the society 》Getting one's works done through cheating, deceit, treachery, or other crooked means. 》Leading a self-centered life of suppressing/oppressing others...

मोबाईल न्यूमरोलॉजी (एक संक्षिप्त लेख)

 ॐ नमः शिवाय। मोबाईल न्यूमरोलॉजी (एक संक्षिप्त लेख) आज मोबाईल न्यूमरोलॉजी पर अपने विचार साझा करना चाहूंगा। देखिए मोबाइल न्यूमरोलॉजी में बहुत से बिंदुओं का आंकलन किया जाता है। सभी बिंदुओं को एक मैसेज में समेटना बहुत ही दुर्लभ है। फिर भी मैं अपना पूरा पूरा प्रयत्न करूंगा। मोबाइल नंबर हम तीन प्रकार से किसी जातक को दे सकते हैं:— १) जातक के भाग्यांक/मूलांक के हिसाब से (इस नंबर को वो हमेशा उपयोग कर सकता है) २) जातक के कार्यक्षेत्र (प्रोफेशन) के हिसाब से (सदैव उपयोग नहीं कर सकता कार्यक्षेत्र बदलने पर जातक को नंबर भी बदलना पड़ेगा) ३) किसी इच्छापूर्ति के आधार पर (सदैव उपयोग नहीं कर सकता इच्छापूर्ति के पश्चात् जातक उस नंबर का प्रयोग न करे तो अच्छा रहेगा) अब सर्वप्रथम बात करते हैं पहले बिंदु की। अर्थात् जातक के भाग्यांक/मूलांक के आधार पर मोबाइल नंबर देने की। तो इसके लिए हमें निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखना चाहिए:— १) जातक के मोबाइल नंबर का कुल योग उसके भाग्यांक अथवा मूलांक पर आए या उसके मित्र के अंक पर आए। २) यदि किसी के मोबाइल नंबर का योग उसके भाग्यांक अथवा मूलांक अथवा उसके मित्र के अंक...

फाइनेंशियल एस्ट्रोलॉजी

 ॐ नमः शिवाय  फाइनेंशियल एस्ट्रोलॉजी जातक/जातिका की कुंडली में विद्यमान शेयर मार्केट के योग कैसे देखें:— १) भाव द्वितीय भाव — अपना स्वयं का पैसा पंचम भाव — इन्वेस्टमेंट नवम भाव — भाग्य एकादश भाव — लाभ/हानि  इन चारों भावों का आपस में संबंध जितना अच्छा बनेगा उतना शेयर मार्केट में मुनाफा होगा। साथ ही साथ हमें उपरोक्त भावों का बलाबल, उपरोक्त भावों की स्थितियां, उपरोक्त भावों के स्वामियों का बलाबल और उपरोक्त भावों के स्वामियों की स्थितियां भी देखनी चाहिए। इनका जितना अधिक बलाबल रहेगा और जितनी अधिक शुभ इनकी स्थितियां होंगी उतना अधिक मुनाफा होगा। २) ग्रह चंद्र — प्रत्येक इनवेस्टमेंट एवं उससे मिलने वाले अंतिम लाभ का कारक,  बुद्ध — बुद्धि का कारक, कहां इन्वेस्ट करना है और कहां नहीं इसको एनालाइज करने के लिए ज़रूरी, मार्केट को एनालाइज करने के लिए ज़रूरी राहु — मार्केट का कारक, मार्केट में उतर चढ़ाव का कारक, इन्वेस्ट करने की स्मार्टनेस को दर्शाता है मंगल — जोख़िम उठाने की काबिलियत देता है, इन्वेस्ट करने का कॉन्फिडेंस देता है लग्न और लग्नेश — पूरी कुंडली का बलाबल  गुरु — भाग्...

१२वें भाव (व्यय/मोक्ष में) ग्रहों के फल पर विचार

 ॐ नमः शिवाय 12वें भाव (व्यय/मोक्ष भाव) में ग्रहों के फल पर विचार ♦️ बुध १२ पीर फकीर के चक्कर बहुत काटता है। ♦️ गुरु १२ अभिमानी होता है। बिना मांगे ज्ञान बांटता रहता है। ♦️ बुध १२ और गुरु १२ किसी की नहीं सुनते।  ♦️ शुक्र १२ मिस्टर परफेक्शनिस्ट होता है। हमेशा दूसरों से अलग दिखता है दूर से भी अलग से पहचाना जाता है। इनको अपना खाने का चम्मच एक दम साफ सुथरा और टनाटन चाहिए। ये सभी अवलोकन 12वें भाव के गूढ़ और सूक्ष्म प्रभावों को दर्शाते हैं। 12वां भाव व्यय, मोक्ष, अलगाव, ध्यान (meditation), और गुप्त चीजों का होता है। जब शुभ ग्रह यहां आते हैं, तो वे इन क्षेत्रों में अपनी ऊर्जा को केंद्रित कर देते हैं, जिससे व्यक्ति का व्यवहार संसार से थोड़ा कटा हुआ या अलग हो जाता है। 1. बुध (Mercury) 12वें भाव में अवलोकन:  "बुध १२ पीर फकीर के चक्कर बहुत काटता है।" और "बुध १२ और गुरु १२ किसी की नहीं सुनते।" विश्लेषण: बुध बुद्धि, तर्क, संचार और जिज्ञासा का कारक है। जब यह 12वें भाव में होता है, तो व्यक्ति की बुद्धि संसार (11वें भाव तक) से हटकर अज्ञात (12वें भाव) की ओर उन्मुख हो जाती है। यह म...

शुक्र ग्रह के कुछ अद्भुत उपाय

 ॐ नमः शिवाय शुक्र ग्रह के कुछ अद्भुत उपाय निम्नलिखित उपाय हैं:— १) अपने घर का आग्नेय कोण (SE) ठीक रखें। २) गऊ सेवा। ३) लक्ष्मी जी की उपासना करें। ४) श्री सूक्त अथवा कनकधारा स्तोत्र का पाठ। ५) शुक्राचार्य जी के गुरु महादेव की उपासना। ६) शुक्र के मंत्रों का जाप। ७) हीरा/ ओपल/ फिरोजा धारण कर सकते हैं। ८) अपने जीवन में अधिक से अधिक लग्ज़री का इस्तेमाल करना। ९) परफ्यूम, डिओड्रेंट, खुशबूदार इत्र, केवड़े का इत्र, मोगरे का इत्र, खुशबूदार पाउडर आदि का उपयोग करना। १०) स्त्रियों की इज़्ज़त करना। स्त्रियों की रिस्पेक्ट करना।  बाकि कौनसा उपाय ज़्यादा कारगर है ये तो जातक की कुंडली ही बता सकती है। उसमें ग्रहों की स्थितियां, दशा, अंतर्दशा आदि। आचार्य दीपक सिक्का संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी

तारा चक्र

 ॐ नमः शिवाय तारा चक्र कुल 9 प्रकार के तारा माने गए हैं, और हर नक्षत्र से ये क्रम चलता है। तारा और उनके फल 1. जन्म तारा — जन्म से संबंधित सामान्य। 2. सम्पत तारा — धन, संपदा, सफलता, लाभकारी। 3. विपत तारा — बाधा, रोग, अशुभ। 4. क्षेम तारा — सुख, शांति, सुरक्षा मिलेगी अवश्य परंतु अपने सामर्थ्य अनुसार दूसरों की सेवा और समाज सेवा करने पर।  5. प्रत्यारी तारा — हानि, विवाद, अशुभ 6. साधक तारा — कार्य सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि, सफलता मिलेगी परंतु अपने आप को  जानने और साधने के बाद। 7. वध तारा — कष्ट, संकट, मृत्यु तुल्य कष्ट, अशुभ। 8. मित्र तारा — सहायक, शुभ। 9. अतिमित्र तारा — यहां मेरे विचार बिल्कुल भिन्न हैं। ये आपका शत्रु नहीं अपितु अतिमित्र होता है। और मित्र की भांति ही आपके लिए सहायक बल्कि अति सहायक होता है। ये साइकिल प्रत्येक माह में तीन बार ही रिपीट होगी क्योंकि प्रत्येक तारे में ३—३ नक्षत्र आते हैं। अतः मेरे विचार से:— 1. सम्पत, मित्र, अतिमित्र — शुभ फलदाई  2. जन्म, क्षेम, साधक — सामान्य फलदाई  3. विपत, प्रत्यारी, वध — अशुभ फलदाई  एक और बात आपकी कुंडली में जो भी...

दशमेश चतुर्थ भावस्थ

 ॐ नमः शिवाय दशमेश चतुर्थ भावस्थ दशमेश जब भी चतुर्थ भाव में बैठेगा जातक को सभी प्रकार की सुख, सुविधाएं प्रदान करेगा।  माता के साथ  जातक की अच्छी बनेगी। माता जातक का प्रत्येक कार्य में पूरा साथ देगी। जनता के बीच जातक की इमेज सदैव सकारात्मक रहेगी। जनता जातक को खूब मान सम्मान देगी। जातक को अपनी पलकों पर बिठाएगी। जातक भूमि, प्रॉपर्टी, कृषि, शिक्षा, ज्योतिष और वास्तु से संबंधित कार्य कर सकता है। सरकारी नौकरी में उच्चस्थ पद पर हो सकता है। किसी NGO या संगठन का संस्थापक या उच्च पद पर हो सकता है। जातक यदि व्यापार में हो तो अपने पिता का कारोबार भी अपना सकता है।  जातक को छोटे भाई बहनों से, पड़ोसियों से, माता से, मामा से, ननिहाल से लाभ और सुख प्राप्त हो सकता है।  जातक के मित्र विश्वास घाती, धन हानि और स्वास्थ्य हानि करने वाले, पीठ पीछे शत्रुता रखने वाले, टांग खींचने वाले और संख्या में कम हो सकते हैं। जातक का ससुराल पक्ष उपदेश देने वाला, हर बात पर टोका टाकी करने वाला, जातक को अपने से नीचा दिखाने वाला और जातक को सदैव धर्म और ज्ञान का पाठ पढ़ाने वाला हो सकता है।  यदि दशमे...

दशमेश तृतीय भावस्थ

 ॐ नमः शिवाय। दशमेश (कर्मेश) तृतीय भावस्थ तृतीय भाव कारकत्व:- पराक्रम, साहस, छोटी यात्राएं, खेल-कूद, छोटे भाई बहन, पड़ौसी, डॉक्यूमेंट्स, गर्दन, श्वास नली, भोजन की नली, अप्पर रेस्पिरेटरी तंत्र। दशम भाव कारकत्व:- पिता, सरकारी सहायता, कर्म, कार्यक्षेत्र, आजीविका, मान सम्मान, सरकारी सेवा, राजनीति, दोनों घुटने।  अब यदि कर्मेश शुभ अवस्था में  तृतीय भावस्थ हो तो:- १) जातक कर्म प्रधान होता है। अपने कर्म से ही सब कुछ बनाने वाला होता है। जातक जिस काम में भी हाथ डालता है उसमें सफल होता है।  २) जातक के छोटे भाई बहन हो सकते हैं जिनसे जातक का मधुर संबंध होता है और जातक को लाभ प्राप्त होता है। ३) जातक की यात्राएं अक्सर शुभ फल दायक और निर्णायक रहती हैं। ४) जातक का पड़ोसियों के साथ घनिष्ठ  मित्रवत सम्बन्ध होता है। पड़ौसी उसके कार्यक्षेत्र और पराक्रम की प्रशंसा करने वाले होते हैं। जातक को पड़ोसियों से लाभ प्राप्त हो सकता है। ५) जातक अपने पिता की संपत्ति में वृद्धि करने वाला होता है। ६) जातक के सभी डॉक्यूमेंट्स सुव्यवस्थित रूप में रहते हैं। ७) जातक खेल कूद में जा सकता है और अच्छा सफ...

दीपावली पर घर की कैसे करें सफाई

 ॐ नमः शिवाय दिवाली की सफाई के समय घर से तुरंत बाहर निकाल फेंके ये चीजें, तभी मां लक्ष्मी की बरसेगी कृपा कहते हैं अगर दिवाली की सफाई के दौरान भी ये चीजें घर से बाहर न निकाली जाएं तो इससे मां लक्ष्मी की नाराजगी का सामना करना पड़ता है। क्योंकि मां लक्ष्मी तो केवल उसी घर में प्रवेश करती हैं जहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया हो। ऐसे में इससे पहले इन चीजों को घर से बाहर जरूर निकाल दें जिससे मां लक्ष्मी आपके घर में आकर ठहर जाएं। टूटे-फूटे बर्तन या कांच के सामान  वास्तु शास्त्र अनुसार टूटे हुए बर्तन, ग्लास या शो पीस दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा का संकेत माने जाते हैं। इसलिए दिवाली की सफाई के समय इन चीजों को घर से तुरंत बाहर निकाल देना चाहिए। टूटा हुआ पलंग यदि आपके घर में टूटा हुआ पलंग है तो इसे भी दिवाली के सफाई के समय तुरंत घर से निकाल दें क्योंकि घर में टूटा पलंग रखने से पति-पत्नी के वैवाहिक जीवन में परेशानियां आने लगती है। खराब घड़ी अगर आपके घर में खराब घड़ी पड़ी है तो उसे भी दिवाली की सफाई के दौरान घर से बाहर निकाल देना चाहिए। कहा जाता है कि घर में खराब घड़ी रखने से दुर्भाग्य आ...

दशम भाव में केतु

 ॐ नमः शिवाय दशम भाव में केतु केतु के कारकत्व:- केतु को आध्यात्मिक विकास, मोक्ष, वैराग्य, तर्क, ज्ञान, अलगाव, और त्याग का कारक माना जाता है। यह व्यक्ति के पूर्व कर्मों को भी दर्शाता है और आकस्मिक घटनाओं, रहस्यमय मामलों और अज्ञात भय से संबंधित होता है। केतु शारीरिक कष्ट, बीमारियों, और भौतिक सुखों से दूरी का प्रतिनिधित्व भी करता है। केतु की दृष्टि:- केतु की तीन दृष्टि मानी गई हैं ५, ७ और ९। अब केतु यदि दशम भाव में बैठेगा तो वो द्वितीय, चतुर्थ और षष्ठम भावों में दृष्टि डालेगा। इस प्रकार केतु ४ भावों में प्रभाव डालेगा २, ४, ६ और १०। अब समझते हैं केतु के दशम भाव में होने वाले परिणामों को। १) कार्यक्षेत्र में बाधाएं डालेगा। जातक को अपना प्रोफेशन बार बार बदलना पड़ेगा या बार बार नौकरी बदलनी पड़ेगी। केतु एक प्रोफेशन में ज़्यादा समय तक टिकने नहीं देता।  २) जातक की आमदनी स्थिर नहीं रह पाएगी। ३) जातक को पिता का साथ नहीं मिलता या पिता से दूर रहता है या पिता से अलगाव रहता है। ४) जातक को सरकार का भी साथ या तो मिलता ही नहीं या फिर न्यूनतम मिलता है। ५) जातक का अपने परिवार वालों से अलगाव रहता ह...

दशमेश द्वितीय भावस्थ

 ॐ नमः शिवाय दशमेश द्वितीय भावस्थ किसी भी जातक/जातिका की कुंडली में यदि दशमेश द्वितीय भाव में स्थित होता है तो एक बात तो तय है कि वो जितना पुरुषार्थ करेगा, जितना अपने काम पर ध्यान देगा, जितनी मेहनत करेगा और जितना कर्म करेगा उतना ही धन कमाएगा, उतनी ही सेविंग्स करेगा और उतना ही लक्ष्मी जी प्रसन्न होंगी। ऐसे जातकों के लिए 'उसका कर्म ही पूजा है' ये कहना गलत नहीं होगा। अब बात आती है कि कौनसा ग्रह दशमेश है और द्वितीय भावस्थ है। क्योंकि प्रत्येक ग्रह की अपनी क्वालिटीज हैं जो हमें ये बताएंगी कि जातक को कैसा कर्म करने से ज़्यादा लाभ होगा।  जैसे कि:- १) सूर्य:- यदि सूर्य दशमेश होकरके द्वितीय भाव में बैठे तो जातक ऑर्डर देने वाला, रौबदार, राजसी ठाठ बात से युक्त हो सकता है। ऐसे जातक को राजनीति, सरकारी नौकरी उच्चस्थ पद बहुत रास आती है क्योंकि उसको रौब दिखाने का अवसर मिलता है। ऐसा जातक डॉक्टर और चिकित्सा विभाग में भी अच्छा कार्य करता है। ऐसा जातक अपना कार्य जितनी ईमानदारी और निष्ठा से करेगा उतना ही लाभ कमाएगा। २) चंद्र:- यदि चंद्र दशमेश होकर द्वितीय भाव में बैठे तो जातक को चिकित्सा शास्त्र, ...