दशमेश तृतीय भावस्थ

 ॐ नमः शिवाय।


दशमेश (कर्मेश) तृतीय भावस्थ


तृतीय भाव कारकत्व:- पराक्रम, साहस, छोटी यात्राएं, खेल-कूद, छोटे भाई बहन, पड़ौसी, डॉक्यूमेंट्स, गर्दन, श्वास नली, भोजन की नली, अप्पर रेस्पिरेटरी तंत्र।


दशम भाव कारकत्व:- पिता, सरकारी सहायता, कर्म, कार्यक्षेत्र, आजीविका, मान सम्मान, सरकारी सेवा, राजनीति, दोनों घुटने। 


अब यदि कर्मेश शुभ अवस्था में  तृतीय भावस्थ हो तो:-


१) जातक कर्म प्रधान होता है। अपने कर्म से ही सब कुछ बनाने वाला होता है। जातक जिस काम में भी हाथ डालता है उसमें सफल होता है। 


२) जातक के छोटे भाई बहन हो सकते हैं जिनसे जातक का मधुर संबंध होता है और जातक को लाभ प्राप्त होता है।


३) जातक की यात्राएं अक्सर शुभ फल दायक और निर्णायक रहती हैं।


४) जातक का पड़ोसियों के साथ घनिष्ठ  मित्रवत सम्बन्ध होता है। पड़ौसी उसके कार्यक्षेत्र और पराक्रम की प्रशंसा करने वाले होते हैं। जातक को पड़ोसियों से लाभ प्राप्त हो सकता है।


५) जातक अपने पिता की संपत्ति में वृद्धि करने वाला होता है।


६) जातक के सभी डॉक्यूमेंट्स सुव्यवस्थित रूप में रहते हैं।


७) जातक खेल कूद में जा सकता है और अच्छा सफल खिलाड़ी बन सकता है। जातक सैन्य बलों में भी अच्छा नाम और लाभ प्राप्त कर सकता है।


८) जातक का कम्युनिकेशन बहुत अच्छा रहता है और जातक की वाणी मधुर एवं आकर्षक होती है। जातक अपनी वाणी से बहुत लाभ प्राप्त कर सकता है।


वहीं यदि कर्मेश अशुभ अवस्था में तृतीय भावस्थ हो तो :-


१) जातक आलसी, कर्म करने से विमुख, इधर उधर भटकने वाला, आसानी से कार्यक्षेत्र में स्टेबल नहीं होने वाला होता है। अपना सब कुछ बर्बाद कर देता है और भटकता रहता है।


२) जातक के छोटे भाई बहन या तो होते ही नहीं या फिर उनसे संबंध अच्छे नहीं होते या फिर जातक उनसे दूर रहता है। जातक के छोटे भाई बहन जातक के कमाए हुए धन को बर्बाद कर देते हैं। 


३) पड़ोसियों से जातक की नहीं बनती और जातक को पड़ोसियों की वजह से अक्सर धनहानि होती है। पड़ोसियों के कारण जातक को बार बार अपमानित होना पड़ता है।


४) जातक की यात्राएं अक्सर असफल ही रहती हैं और यात्राओं से उचित लाभ प्राप्त नहीं होता उल्टा धनहानि होती रहती है। 


५) जातक अपने पिता की संपत्ति का ह्रास करवदेता है जिससे कि जातक और पिता में भी शत्रुता उत्पन्न हो जाती है।


६) जातक व्यसनों का आदि हो जाता है जिससे कि धनहानि और अधिक होने लगती है।


७) जातक को आलस्पन और व्यसनों का आदि होने के चलते स्वास्थ हानि हो सकती है मुख्य रूप से गर्दन और श्वास से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं।


८) जातक का कोई भी डॉक्यूमेंट्स सुव्यवस्थित नहीं रहता सब अस्त व्यस्त रहता है और उसको बार बार अपने डॉक्यूमेंट्स ठीक करवाने पड़ते हैं। डॉक्यूमेंट्स खोने और चोरी होने के भी चांसेज बढ़ जाते हैं। जातक अक्सर अपने डॉक्यूमेंट्स को खोजता हुआ ही मिलता है। 


९) जातक ज़िन्दगी भर भटकता रहता है और समय एवं पैसे की बर्बादी करता रहता है। 


आचार्य दीपक सिक्का

संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी

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