मोबाईल न्यूमरोलॉजी (एक संक्षिप्त लेख)
ॐ नमः शिवाय।
मोबाईल न्यूमरोलॉजी (एक संक्षिप्त लेख)
आज मोबाईल न्यूमरोलॉजी पर अपने विचार साझा करना चाहूंगा।
देखिए मोबाइल न्यूमरोलॉजी में बहुत से बिंदुओं का आंकलन किया जाता है। सभी बिंदुओं को एक मैसेज में समेटना बहुत ही दुर्लभ है। फिर भी मैं अपना पूरा पूरा प्रयत्न करूंगा।
मोबाइल नंबर हम तीन प्रकार से किसी जातक को दे सकते हैं:—
१) जातक के भाग्यांक/मूलांक के हिसाब से (इस नंबर को वो हमेशा उपयोग कर सकता है)
२) जातक के कार्यक्षेत्र (प्रोफेशन) के हिसाब से (सदैव उपयोग नहीं कर सकता कार्यक्षेत्र बदलने पर जातक को नंबर भी बदलना पड़ेगा)
३) किसी इच्छापूर्ति के आधार पर (सदैव उपयोग नहीं कर सकता इच्छापूर्ति के पश्चात् जातक उस नंबर का प्रयोग न करे तो अच्छा रहेगा)
अब सर्वप्रथम बात करते हैं पहले बिंदु की। अर्थात् जातक के भाग्यांक/मूलांक के आधार पर मोबाइल नंबर देने की।
तो इसके लिए हमें निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखना चाहिए:—
१) जातक के मोबाइल नंबर का कुल योग उसके भाग्यांक अथवा मूलांक पर आए या उसके मित्र के अंक पर आए।
२) यदि किसी के मोबाइल नंबर का योग उसके भाग्यांक अथवा मूलांक अथवा उसके मित्र के अंक पर नहीं आ रहा है लेकिन उसके मोबाइल के अंतिम २ अंको का योग उसके भाग्यांक अथवा मूलांक अथवा उसके मित्र के अंक पर आ जाता है तब भी वो मोबाइल नंबर ठीक है।
३) यदि किसी के मोबाइल नंबर का योग एवं मोबाइल नंबर के अंतिम दो अंको का योग भी उसके भाग्यांक अथवा मूलांक अथवा उसके मित्र के अंक पर नहीं आ रहा है लेकिन उसके मोबाइल नंबर के अंतिम दो अंक उसके भाग्यांक अथवा मूलांक अथवा उसके मित्र के अंक से मेल खाते हैं तब भी वो मोबाइल नंबर ठीक है।
अब बात आती है कि इसका निर्णय कैसे करें।
तो देखिए उसके लिए भी कुछ महत्वपूर्ण बिंदु दिए गए हैं:—
१) नंबर १ नंबर १, २, ३, ५, ७, ९ का मित्र है।
नंबर ६ नंबर ४, ५, ६, ७, ८ का मित्र है।
नंबर ५ सभी अंको (१, २, ३, ४, ५, ६, ७, ८, ९) का मित्र है।
२) नंबर २, ४, ८ मानसिक तनाव देते हैं और संघर्ष देते हैं अतः इन अंकों को मोबाइल नंबर के योग में अथवा मोबाइल नंबर के अंतिम दो अंकों के योग में अथवा मोबाइल नंबर के अंतिम दो अंकों में पूर्णतः अवॉइड करना चाहिए।
३) शनि देव जिनका कि अंक ८ है न्यूमरोलॉजी के हिसाब से कर्म, अचल संपत्ति और राजयोग निर्माता माना गया है और राहु देव जिनका अंक ४ है उनको चल संपत्ति, वाक सिद्धि और आगे बढ़ने की चाह का कारक माना गया है। अतः कम से कम मोबाइल नंबर में एक बार ४ एवं ८ अंक आना अच्छा माना गया है। परंतु वो अंक अंत के दो अंकों में नहीं होना चाहिए और न ही योग में होना चाहिए।
४) इस प्रकार से हम देखेंगे कि
जिनका भाग्यांक/ मूलांक १, २, ३, ५, ७, ९ है उनके मोबाइल नंबर का योग अथवा मोबाइल नंबर के अंतिम दो अंकों का योग अथवा मोबाइल नंबर के अंतिम दो अंक १ या ५ होने चाहिएं।
जिनका भाग्यांक/ मूलांक ४, ५, ६, ७, ८ है उनके मोबाइल नंबर का योग अथवा मोबाइल नंबर के अंतिम दो अंकों का योग अथवा मोबाइल नंबर के अंतिम दो अंक ६ या ५ होने चाहिएं।
अब बात करते हैं जातक के कार्यक्षेत्र के हिसाब से मोबाइल नंबर देने की।
तो इसमें हमें जातक का कार्यक्षेत्र देखना होगा। जैसे कि:—
टीचर है तो मोबाइल नंबर का योग गुरु के नंबर ३ अथवा बुध के नंबर ५ पर आना अच्छा है।
डॉक्टर है तो नंबर १, ३, ६ पर, सर्जन है तो १, ३, ७, ९ पर।
इस प्रकार अलग अलग प्रोफेशन के हिसाब से चयन किया जा सकता है।
इसी प्रकार अलग अलग इच्छापूर्ति के लिए भी अलग अलग नंबर सजेस्ट किया जा सकता है।
मोबाईल न्यूमरोलॉजी अपने आप में एक बहुत बड़ा विषय है जिसको एक मैसेज में कदापि नहीं समेटा जा सकता।
फिर भी मैंने अपनी ओर से मुख्य बिन्दुओं को समाहित करने का भरसक प्रयास किया है।
आपके आशीर्वाद का अभिलाषी
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
कुछ न्यूमरोलॉजिस्ट द्वारा अंतिम 4 अंको को मुख्य लिया जाता है कुछ का कहना है अंतिम 5 अंक महत्वपूर्ण है । कृपया उस भी भी विचार साझा करें
जवाब देंहटाएंहमारे ब्लॉग पर प्रतिक्रिया देने हेतु आपका सहृदय धन्यवाद। आपकी बात अपनी जगह पर बिल्कुल सही है। न्यूमरोलॉजी में मोबाइल नंबर कैलकुलेशंस के बहुत सारे तरीके विद्यमान हैं। मैं पूर्ण रूपेण ये प्रयास करूंगा कि न्यूमरोलॉजी पर अपने आने वाले ब्लॉग्स में आपकी सभी शंकाओं का समाधान कर सकूं।
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