दशमेश द्वितीय भावस्थ
ॐ नमः शिवाय
दशमेश द्वितीय भावस्थ
किसी भी जातक/जातिका की कुंडली में यदि दशमेश द्वितीय भाव में स्थित होता है तो एक बात तो तय है कि वो जितना पुरुषार्थ करेगा, जितना अपने काम पर ध्यान देगा, जितनी मेहनत करेगा और जितना कर्म करेगा उतना ही धन कमाएगा, उतनी ही सेविंग्स करेगा और उतना ही लक्ष्मी जी प्रसन्न होंगी।
ऐसे जातकों के लिए 'उसका कर्म ही पूजा है' ये कहना गलत नहीं होगा।
अब बात आती है कि कौनसा ग्रह दशमेश है और द्वितीय भावस्थ है। क्योंकि प्रत्येक ग्रह की अपनी क्वालिटीज हैं जो हमें ये बताएंगी कि जातक को कैसा कर्म करने से ज़्यादा लाभ होगा।
जैसे कि:-
१) सूर्य:- यदि सूर्य दशमेश होकरके द्वितीय भाव में बैठे तो जातक ऑर्डर देने वाला, रौबदार, राजसी ठाठ बात से युक्त हो सकता है। ऐसे जातक को राजनीति, सरकारी नौकरी उच्चस्थ पद बहुत रास आती है क्योंकि उसको रौब दिखाने का अवसर मिलता है। ऐसा जातक डॉक्टर और चिकित्सा विभाग में भी अच्छा कार्य करता है। ऐसा जातक अपना कार्य जितनी ईमानदारी और निष्ठा से करेगा उतना ही लाभ कमाएगा।
२) चंद्र:- यदि चंद्र दशमेश होकर द्वितीय भाव में बैठे तो जातक को चिकित्सा शास्त्र, साइकोलॉजी, क्रिएटिव कार्य और हीलिंग एक्सपर्ट जैसे जारी करके अत्यधिक लाभ मिलता है। ऐसा जातक यदि दूसरों की सहायता करे और अपने व्यवहार से दूसरों का दिल जीत ले तो कहना ही क्या। ऐसे जातक अक्सर शांति प्रिय, इमोशनल होते हैं। इनकी वाणी भी मधुर होती है। ऐसे जातक कला के क्षेत्र में भी अच्छा नाम कमा सकते हैं।
इनकी दो ही कमियां हैं इनको मोटिवेट करने की आवश्यकता होती है और सदैव दूसरे की सपोर्ट चाहिए होती है।
३) मंगल:- मंगल वाले जातक ऊर्जावान होते हैं और इन्हें अच्छी कमाई के लिए ऐसा फील्ड चुनना चाहिए जिसमें ऊर्जा की खपत हो ऐसे विभाग में इन्हें अच्छी सफलता और लाभ मिलता है। जैसे योग टीचर, योग प्रैक्टिशनर, मशीनरी, इंजीनियर, बिजली विभाग, स्पोर्ट्स, दबंग, बाहुबली, सैन्य सेवा आदि आदि।
ये लोग वास्तु के क्षेत्र में भी अच्छा लाभ कमाते हैं क्योंकि ये दूसरे की ऊर्जाओं को संतुलित कर सकते हैं।
इनकी वाणी खराब होती है और ये अपने आप को अच्छे से पेश भी नहीं कर सकते।
इसलिए इन्हें चाहिए कि अपनी वाणी पर ध्यान दें और अपने संबंधों को बनाए रखें।
४) गुरु:- यदि गुरु हो तो ऐसे जातकों को चाहिए कि वो शिक्षा के क्षेत्र में जाएं क्योंकि ज्ञान लेने और देने में ये माहिर होते हैं। शिक्षा के अतिरिक्त ये जातक एडमिनिस्ट्रेशन में, कानून से संबंधित कार्यों में, ज्योतिष में, हीलिंग में अच्छा नाम और लाभ कमा सकते हैं।
ये जातक जितना परोपकार करेंगे उतनी जल्दी सफलता की सीढ़ी चढ़ेंगे।
५) बुध:- बुध हो तो ऐसे जातक बहुत से क्षेत्र में जा सकते हैं। व्यापार में, एडमिनिस्ट्रेशन में, कम्युनिकेशन संबंधित कार्यों में, मार्केटिंग में, कंप्यूटर में, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में, शिक्षा के क्षेत्र में, ज्योतिष में, वास्तु में आदि आदि। इन सभी क्षेत्रों में ये जातक अत्यधिक लाभ कमा सकते हैं।
इनकी वाणी ही इनके कमाने का साधन बन सकता है। जितनी मीठी और अट्रैक्टिव वाणी होगी उतना ही लाभ कमाएगा।
६) शुक्र:- यदि शुक्र हो तो ऐसे जातकों को स्त्रियों से संबंधित कार्यों में अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है। जैसे कि ब्यूटी पार्लर, ब्यूटी प्रोडक्ट, कॉस्मेटिक्स, ज्वैलरी, आर्टिफिशियल ज्वैलरी, स्त्रियों के कपड़ों की दुकान। इसके अलावा ये खान पान का कार्य भी कर सकते हैं जैसे रेस्टोरेंट, होटल इंडस्ट्री, फूड कोर्ट और ऐसे जातकों को फ़ैशन इंडस्ट्री से भी लाभ प्राप्त हो सकता है। ऐसे जातक एक्टिंग, सिंगिंग, राइटिंग और कला के क्षेत्र में भी अच्छा लाभ ले सकते हैं।
इनको बस अपने आप को और अपनी बातों को ठीक से समझना और एक्सप्रेस करना आना चाहिए।
ऐसे पुरुष जातकों को चाहिए कि वो अपनी पत्नी का खास ध्यान रखें और धोखे बाज़ी से बचे रहें। ईमानदार रहें।
७) शनि:- यदि शनि हों तो ऐसे जातक फैक्ट्री, सैनिटरी का कार्य, ठेकेदारी का कार्य, लोहे का कार्य, इंडस्ट्री आदि से लाभ प्राप्त कर सकता है। इनके लिए NGO चलाना भी लाभकारी होता है। किसी भी प्रकार का सेवा कार्य। सरकारी सेवा का कार्य आदि भी लाभ प्राप्ति के साधन बन सकते हैं।
इनको अपना कार्य ईमानदारी और निष्ठा से करना चाहिए। वाणी को सुधारना चाहिए। ये जितना अपने से नीचे काम करने वालों का ध्यान रखेंगे उतना ही आगे बढ़ते जाएंगे।
बाकि किसको कौनसा कार्य ज़्यादा सूट करेगा ये तो संपूर्ण कुंडली के अध्ययन के बाद ही पता लग सकता है क्योंकि कार्य और स्वभाव कैसा रहेगा ये बाकी ग्रहों की स्थितियों पर भी निर्भर करता है।
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
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