अपनी कुंडली के योगकारक ग्रहों को कैसे पहचाने

ॐ नमः शिवाय 

अपनी कुंडली के योगकारक ग्रहों को कैसे पहचानें:—

इस पर मेरे विचार:—

योगकारक ग्रह निकालने के निम्नलिखित सूत्र हैं:—

१) यदि एक ही ग्रह केन्‍द्र व त्रिकोण दोनों का स्‍वामी हो तो योगकारक होता है।

ये सूत्र अपने आप में बिल्कुल सही है परंतु ये सूत्र सभी लग्नों पर लागू नहीं हो पाता। 

क्योंकि सभी लग्नों में कोई एक ही ग्रह केंद्र और त्रिकोण भावों का स्वामी बन जाए ऐसा ज़रूरी नहीं है।

अतः ऐसे लग्नों के लिए (जिनमें कोई एक ही ग्रह केंद्र और त्रिकोण दोनों का स्वामी न हो) एक और सूत्र दिया गया है जो निम्नलिखित है:—

२) ऐसे लग्नों में वो ग्रह योगकारक बनेगा जो त्रिकोण का स्वामी तो हो परंतु किसी मारक भाव और त्रिक भाव का स्वामी न हो।

इस दूसरे सूत्र में भी एक अपवाद है वो ये कि मिथुन लग्न में शुक्र योगकारक होता है। 

अब मिथुन लग्न में शुक्र त्रिकोण का स्वामी तो है परंतु साथ साथ द्वादश भाव का स्वामी भी है जो कि एक त्रिक भाव है। 

परंतु यदि देखा जाए तो द्वादश भाव को शुक्र के लिए अत्यंत शुभ भाव माना गया है यहां पर शुक्र अति विशिष्ट कारक होता है। 

शायद इसीलिए द्वादश भाव को शुक्र के लिए त्रिक भाव न माना गया हो और मिथुन लग्न के लिए योगकारक माना गया हो।

आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल ऑकल्ट ग्रुप

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मोबाईल न्यूमरोलॉजी (एक संक्षिप्त लेख)

फाइनेंशियल एस्ट्रोलॉजी

Number 4 and 8 in Numerology