वर वधु मिलान

ॐ नमः शिवाय।


वर वधु मिलान


वैवाहिक कुंडली मिलान के लिए अष्टकूट मिलान ही सर्वेसर्वा नहीं है। 


बल्कि पूर्ण वैवाहिक मिलान के लिए और भी बहुत सारे बिंदु हैं जिनको देखना अत्यावश्यक है और प्रत्येक ज्योतिष को देखना ही चाहिए।


परंतु ये अत्यंत दुःख की बात है कि आज के ज्योतिष केवल अष्टकूट मिलान तक ही सीमित रह गए हैं। 


जबकि वैवाहिक जीवन सुचारू रूप से चले उसके लिए विवाह से पूर्व अष्टकूट मिलान के साथ ही हमें वर वधु दोनों की कुंडली में अन्य बातों को भी देखना चाहिए। जैसे कि:—

 

1) मांगलिक दोष ।


2) वर वधु का लग्नेश और सप्तमेश दोनों की अपनी कुंडली में तथा अपने से दूसरे की कुंडली में 6 ,8,12भाव मे होकर अशुभ प्रभाव मे नही होने चाहिए।


3) वर के लिए दशम और डी 10 (दशमांश) वर्ग चार्ट देखना चाहिए कि जातक क्या कर्म करता है और कर्मक्षेत्र कैसा रहेगा।


4) वर वधु दोनों की कुंडली में लग्न व लग्नेश, द्वितीय व द्वितीयेश, चतुर्थ व चतुर्थेश, पंचम पंचमेश, सप्तम व सप्तमेश, नवम व नवमेश और एकादश व एकादशेश को भी देखना चाहिए।


5) दोनो के चरित्र को देखने के लिए बुध व शुक्र  की स्थितियां और आठवां बारहवां भाव देखना चाहिए।


6) दोनो की  जन्म राशियां  तथा लग्न आपस में द्वि द्वादश तथा षडाष्टक के संबंध में नहीं होनी चाहिए।


7) दोनो के जन्म नक्षत्रो का वेध नहीं होना चाहिए। 


8) वर की कुंडली में शुक्र और वधु की कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति भी देखनी चाहिए।


9) विवाह सुख के लिए डी 9  (नवमांश) वर्ग चार्ट को भी देखना चाहिए।


10) संतान सुख के लिए डी 7 (सप्तमांश) वर्ग चार्ट को भी देखना चाहिए।

 

एक विवाह के लिए हमें उपरोक्त सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए और सभी विषय अच्छे से देख कर ही बात आगे बढ़ानी चाहिए।


आचार्य दीपक सिक्का 

संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी 

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