प्रत्येक भाव कुछ नहीं अपितु बहुत कुछ कहता है (भाग १)

 ॐ नमः शिवाय 


प्रत्येक भाव कुछ नहीं अपितु बहुत कुछ कहता है


आज बात करते है प्रथम भाव की।


प्रथम भाव यानि लग्न, यानि आप स्वयं, आपकी आदतें, आपकी हेल्थ, आपका स्वभाव, आप से संबंधित प्रत्येक बात लग्न से संबंधित है। लग्न ही बताता है कि आप कैसे हैं।


परंतु लग्न और भी बहुत कुछ बताता है


१) जैसे कि आपके परिवार और बचत किए गए धन (२ भाव) का व्यय है लग्न। आप अपनी वाणी का व्यय (प्रयोग) कहां और कैसे करेंगे ये भी बताएगा आपका लग्न।

२) आपके छोटे भाई बहन और आपके पराक्रम (३ भाव) की आय और इच्छा पूर्ति (प्राप्त होने वाला फल) है लग्न। आपके संबंध आपके पड़ोसी और छोटे भाई बहनों से कैसे रहेंगे, उनसे आपको लाभ होगा या हानि ये भी आपका लग्न बताएगा। आपकी यात्राएं लाभ प्रद होंगी या नहीं, सरकारी डॉक्यूमेंट्स से आपको लाभ होगा या हानि ये सब भी लग्न ही बताएगा।

३) आपकी माता (४ भाव) का कार्यक्षेत्र (कर्म) है लग्न। आपको सुख प्राप्ती के लिए कौन से कर्म करने पड़ेंगे, आपको गाड़ी बंगला किन कर्मों को करने से या किस फील्ड से संबंधित कार्य करने से मिलेगा, ये भी लग्न ही बताएगा। आपकी माता के पिता (आपके नाना) एवं उनके संस्कार हैं लग्न।

४) आपके बच्चों (५ भाव) का भाग्य है लग्न। आपके भाग्य के निर्माण में आपकी शिक्षा का क्या योगदान रहेगा, कौनसी शिक्षा आपके भाग्य के लिए अच्छी रहेगी, आपके प्रेम का भाग्य क्या रहेगा, आपका प्रेम टिकेगा या नहीं, शेयर मार्किट आपके भाग्य में क्या योगदान देगा, आपके बच्चों के संस्कार कैसे रहेंगे ये सब लग्न ही बताएगा।

५) आपके ननिहाल से मिलने वाला आकस्मिक लाभ एवं गुप्त ज्ञान है लग्न, आपके शत्रुओं, ऋण, और रोग (६ भाव) से मिलने वाला आकस्मिक लाभ है लग्न, आप अपनी दिनचर्या से कैसे आकस्मिक लाभ ले सकते हैं, आपकी प्रतिस्पर्धा में आप किन गुप्त बातों, गुप्त नियमों और गुप्त सूत्रों को अपना कर जीत सकते हैं, आप को ऋण किन गुप्त नियमों के तहत मिलेगा, किन गुप्त सूत्रों को लगाकर आप अपने बड़े से बड़े शत्रुओं को परास्त कर सकते है ये सब भी लग्न ही बताएगा। 

६) जीवनसाथी (७ भाव) से सामंजस्य, प्रेम और साथ है लग्न, किसी भी प्रकार की साझेदारी का विश्वास एवं अविश्वास है लग्न, लग्न ही बताएगा कि साझेदार कैसे मिलेंगे, लग्न ही बताएगा आमदनी कितनी और किस प्रकार की होगी।

७) आपके गुप्त ज्ञान एवं आकस्मिक लाभ (८ भाव)  का शत्रु है लग्न, आपके मन में चल रहा द्वंद्व है लग्न, आपके गुप्त ज्ञान, गुप्त नियमों और गुप्त सूत्रों के द्वारा बन रही प्रतिस्पर्धा है लग्न, आपकी दिनचर्या में चल रहि अनियमितता है लग्न, आपका और आपके गुप्त ज्ञान का डर है लग्न। आपके ससुराल से सामंजस्य , प्रेम और शत्रुता है लग्न।

८) आपके पिता (९ भाव) की पहली संतान, शिक्षा, बुद्धि , प्रेम, समर्पण और आकस्मिक लाभ है लग्न। आपके पिता के संस्कारों का सार है लग्न। आपके अध्यात्म का विकास और विस्तार है लग्न एवं आपके संस्कार और प्रथा का विस्तार है लग्न। 

९) आपके पिता और कर्मों (१० भाव) से प्राप्त सुख है लग्न, आपके कार्यक्षेत्र का विकास और विस्तार है लग्न, आपके पिता की माता (आपकी दादी) है लग्न, सरकारी सहायता से प्राप्त सुख एवं लाभ है लग्न, राजनीति एवं राजनीतिज्ञों से प्राप्त सुख एवं लाभ है लग्न। 

१०) आपकी इच्छा पूर्ति, आय और लाभ (११ भाव) के मध्य आया संघर्ष है लग्न, आपके मित्र द्वारा दिया गया संघर्ष है लग्न, आपके मित्र द्वारा किया गया धोखा है लग्न, आपके चाचा द्वारा किया गया पराक्रम है लग्न। 

११) आपके व्यय (१२ भाव) की वृद्धि है लग्न। आपके द्वारा किए गए त्याग का परिणाम एवं विस्तार है लग्न। आपके रोगों और अपराधों का विस्तार है लग्न। आपकी विदेश यात्राओं का प्रचार और प्रसार है लग्न। 


तो इसलिए लग्न को केवल लग्न ही ना समझें अपितु बहुत कुछ है ये लग्न।


 आचार्य दीपक सिक्का

संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी 

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