प्रत्येक भाव कुछ नहीं अपितु बहुत कुछ कहता है (भाग २)
ॐ नमः शिवाय
प्रत्येक भाव कुछ नहीं अपितु बहुत कुछ कहता है
आज बात करते है द्वितीय भाव की।
द्वितीय भाव यानि घर—परिवार, वाणी, स्वाद, संचित धन, आपके संचित धन (सेविंग्स)और आपके घर—परिवार से संबंधित प्रत्येक बात द्वितीय भाव से संबंधित है। द्वितीय भाव ही बताता है कि आपके पास कितना संचित धन है, कितना धन आप संचित कर पाएंगे, आपके पारिवारिक रिश्ते जैसे हैं, आपका परिवार सुखी और संपन्न है या नहीं, आपका स्वाद कैसा है, खाने में आपको क्या स्वादिष्ट लगता है और आपकी वाणी कैसी है।
द्वितीय भाव को मारक भाव भी कहा जाता है क्योंकि ये भाव तृतीय भाव से बारहवां भाव है और प्रत्येक भाव से बारहवां भाव अपने अगले भाव का क्षय करता है। तृतीया भाव से भी हम आयु देखते हैं क्योंकि तृतीय भाव अष्टम से अष्टम है और अष्टम भाव आयु का है। तो अष्टम से अष्टम भाव यानी तृतीय भाव भी आयु का हुआ और तृतीया से बारहवां भाव यानी द्वितीय भाव आयु का क्षय यानी मारक भाव हुआ।
परंतु द्वितीय भाव और भी बहुत कुछ बताता है
१) जैसे कि आपके लग्न (प्रथम भाव) का लाभ एवं मल्टीप्लिकेशन है द्वितीय भाव
२) आपके पराक्रम, छोटे भाई बहन और आयु (३ भाव) का व्यय और क्षति है द्वितीय भाव। आपके पड़ोसियों से अनबन एवं परेशानियां है द्वितीय भाव, वाणी का व्यय अर्थात् वाणी का न होना या खराब हो जाना है द्वितीय भाव, स्वाद का कड़वापन है द्वितीय भाव।
३) आपकी माता (४ भाव) की आय और इच्छा पूर्ति है द्वितीय भाव, आपकी माता के मित्र और चाचा हैं द्वितीय भाव, जनता द्वारा (४ भाव) कमाया गया लाभ है द्वितीय भाव, आपकी प्रॉपर्टी एवं वाहनों द्वारा प्राप्त सुख, लाभ और इच्छा पूर्ति है द्वितीय भाव।
४) आपके बच्चों (५ भाव) का कार्यक्षेत्र है द्वितीय भाव, आपके बच्चों के पिता (आप स्वयं) हैं द्वितीय भाव, आपके प्रेम को प्राप्त करने के लिए आपके द्वारा किए गए प्रयास हैं द्वितीय भाव, इन्वेस्टमेंट से लाभ प्राप्त करने के लिए किए गए प्रयास हैं द्वितीय भाव, आपकी शिक्षा आपके कितने काम आएगी ये भी बताएगा द्वितीय भाव।
५) आपके शत्रुओं, ऋण, और रोग (६ भाव) से मिलने वाला भाग्य या दुर्भाग्य है द्वितीय भाव। आपके शत्रुओं के संस्कार हैं द्वितीय भाव, आपके ऋण और रोग के लक्षण हैं द्वितीय भाव, आपके कॉम्पीटिशन का बलाबल है द्वितीय भाव, दिनचर्या से उत्पन्न कर्त्तव्य हैं द्वितीय भाव।
६) आपके जीवनसाथी (७ भाव) का ससुराल एवं गुप्त ज्ञान है द्वितीय भाव, आपके पार्टनरशिप द्वारा प्राप्त संतुलन एवं आकस्मिक लाभ है द्वितीय भाव। आपकी दैनिक आय से प्राप्त बदलाव एवं लाभ है द्वितीय भाव।
७) आपके गुप्त ज्ञान एवं आकस्मिक लाभ (८ भाव) का हिस्सेदार है द्वितीय भाव, आपकी ससुराल के द्वारा प्राप्त आकस्मिक लाभ, संघर्ष एवं संतुलन है द्वितीय भाव।
८) आपके पिता (९ भाव) के रोग, ऋण और शत्रु हैं द्वितीय भाव, आपके आध्यात्म मार्ग में आने वाले संघर्ष एवं कष्ट हैं द्वितीय भाव।
९) आपके कर्मों (१० भाव) से प्राप्त संतान, प्रसिद्धि, पद, संचित कर्म एवं आपके कर्मों के प्रति लगाव है द्वितीय भाव।
१०) आपकी आय और लाभ (११ भाव) से प्राप्त सुख है द्वितीय भाव, आपके चाचा एवं मित्रों से प्राप्त सुख है द्वितीय भाव।
११) आपके व्यय (१२ भाव) के द्वारा अर्जित बुद्धिमत्ता, पराक्रम, सरकारी सहायता , कम्युनिकेशन स्किल्स और यात्राएं है द्वितीय भाव।
तो इसलिए द्वितीय भाव को केवल परिवार एवं संचित धन ही ना समझें अपितु बहुत कुछ है ये द्वितीय भाव।
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
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