चंद्र — मंगल योग

ॐ नमः शिवाय


चंद्र — मंगल योग


जन्म कुण्डली में अगर चन्द्र और मंगल किसी भी एक राशि में एक साथ हो तो यह योग बनता है। 


इसके साथ ही इस योग में अगर चंद्रमा और मंगल एक दूसरे को देख रहे हैं तो भी इस योग का निर्माण होता है। 


इस योग वाले व्यक्ति के पास बहुत सी धन संपत्ति होती है।


परन्तु उसके अपनी माता और अन्य सगे संबन्धियों के साथ उसका व्यवहार अच्छा नहीं होता है।


जब चन्द्र और मंगल पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति ईमानदारी से धन कमाता है। 


किन्तु अगर किसी पाप ग्रह की दृष्टि हो तो व्यक्ति धन कमाने के लिए अनुचित रास्तों का प्रयोग करता है।


चन्द्र-मंगल योग का फल


चन्द्र मंगल योग व्यक्ति को उच्च मनोबल में वृ्द्धि करता है। ऐसा व्यक्ति सामर्थ्यवान और शक्तिशाली होता है। 


व्यक्ति बुद्धिमान और एकाग्र मन वाला होता है। 


इसके साथ ही यह योग क्योंकि धन योग है, इसलिए इस योग वाला व्यक्ति अपने पुरुषार्थ से धन अर्जित करने में सफल होता है।


इस योग के प्रभाव से व्यक्ति में क्रोध भी अधिक होता है। 


मंगल का संबंध चंद्रमा के साथ होने पर जातक एक प्रकार से जिद्दी भी हो सकता है। 


अपने साहस के कारण ही वो परेशानियों से भी बेहतर रुप से निजात पा सकता है। 


अपने काम को करने में दूसरों की मदद नही मिल पाती है। अपने संघर्ष से आगे बढ़ने की योग्यता जातक में होती ही है। 


इस योग का प्रभाव नकारात्मक रुप से जातक की माता को प्रभावित कर सकता है।


इस योग में अशुभ प्रभाव के कारण जातक को इसके विपरीत परिणाम झेलने पड़ सकते हैं जैसे की व्यक्ति व्यर्थ के वाद-विवाद में फंस कर परेशान होता है। जातक गलत कामों में पड़ सकता है और शार्टकट के रास्ते अपना कर अपने लिए स्थिति खराब कर देता है। 


जातक के परिवार के सभी रिश्ते भी खराब हो सकते हैं। 


स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं उसे परेशान कर सकती है। मानसिक रुप से जातक तनाव और क्रोध का शिकार होता है।


यहां एक बात गौर करने वाली है कि इस योग में अग्नि तत्व मंगल और जल तत्व चंद्र विद्यमान हैं। तो ये जातक के चंद्र पर निर्भर करेगा कि वो मंगल की ऊर्जा को कैसे सम्हाल पाता है।


आचार्य दीपक सिक्का

संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी

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