ऋणानुबंध

 ऋणानुबन्धरूपेण पशुपत्नीसुतालयाः।

ऋणक्षये क्षीयन्ते तत्र परिवेदना॥

... पद्म पुराण 


पशु (संपत्ति/साधन), पत्नी, पुत्र और घर है - ये सब ऋणानुबन्ध के रूप में ही संबद्ध होते हैं। जब वह ऋण समाप्त हो जाता है, तो वे संबंध भी क्षीण हो जाते हैं, और वहीं से वेदना (पीड़ा) उत्पन्न होती है।


पीड़ा इसलिए नहीं कि वे चले गये, बल्कि इसलिए कि हमने उन्हें शाश्वत समझ लिया।

जो संबंध ऋण पर आधारित थे, उन्हें हमने प्रेम पर आश्रित मान लिया। पीड़ा का कारण वियोग नहीं, भ्रम का टूटना है।


आपका अपना 

आचार्य दीपक सिक्का 

संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी 

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